PodcastsReligieRajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

Rajat Jain
Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers
Nieuwste aflevering

826 afleveringen

  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    08-06-2026 | 6 Min.
    श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥

    ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥

    रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥

    जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥

    जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी। धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥

    महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,
    प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
    दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
    पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥

    नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,
    कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
    महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
    जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥

    नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥

    प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥

    क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥

    रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥

    नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥

    समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥

    अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥

    नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    06-06-2026 | 6 Min.
    श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
    उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
    अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
    करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥

    ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका,
    धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी।
    कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी,
    नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥

    रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता,
    चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी।
    अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी,
    प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥

    जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी,
    सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी।
    प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी,
    जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥

    जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी,
    विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी।
    धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके,
    किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥

    महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,
    प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
    दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
    पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥

    नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,
    कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
    महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
    जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥

    नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी,
    कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी।
    समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी,
    भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥

    प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-
    वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्।
    स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
    गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥

    क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी,
    क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी।
    क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी,
    नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥

    रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता,
    चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता।
    धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी,
    प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥

    नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका,
    कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी।
    महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी,
    जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥

    समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी,
    षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी।
    महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी,
    मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥

    अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी,
    विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा।
    इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं,
    पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥

    नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Bala Krishna Ashtakam बालकृष्ण अष्टकम्

    29-03-2026 | 3 Min.
    Bala Krishna Ashtakam बालकृष्ण अष्टकम्

    श्रीमन्नन्दयशोदा हृदयस्थित भावतत्परो भगवान् ।
    पुत्रीकृत निजरूपः स जयति पुरतः कृपालुर्बालकृष्णः ॥ १॥

    कथमपि रिङ्गणम करोद ङ्गणगतजानु घर्षणोद्युक्तः ।
    कटितटकिङ्किणि जालस्वन शङ्कितमानसः सदा ह्यास्ते ॥ २॥

    विकसितपङ्कज नयनः प्रकटित हर्षः सदैव धूसराङ्गः ।
    परिगच्छति कटिभङ्ग प्रसरीकृत पाणियुग्माभ्याम् ॥ ३॥

    उपलक्षित दधिभाण्डः स्फुरितब्रह्माण्ड विग्रहो भुङ्क्ते ।
    मुष्टीकृतनवनीतः परमपुनीतो मुग्धभावात्मा ॥ ४॥

    नम्रीकृतविधुवदनः प्रकटीकृत चौर्यगोपनायासः ।
    स्वाम्बोत् सङ्गविलासः क्षुधितः सम्प्रति दृश्यते स्तनार्थी ॥ ५॥

    सिंहनखाकृति भूषणभूषित हृदयः सुशोभते नित्यम् ।
    कुण्डलमण्डितगण्डः साञ्जन नयनो निरञ्जनः शेते ॥ ६॥

    कार्यासक्त यशोदागृह कर्मावरोधकः सदाऽऽस्ते ।
    तस्याः स्वान्त निविष्ट प्रणय प्रभाजनो यतोऽयम् ॥ ७॥

    इत्थं व्रजपति तरुणी नमनीयं ब्रह्मरुद्राद्यैः ।
    कमनीयं निजसूनुं लालयति स्म प्रत्यहं प्रीत्या ॥ ८॥

    श्रीमद्वल्लभ कृपया विशदीकृतम एतदष्टकं पठेद्यः ।
    तस्य दयानिधिकृष्णे भक्तिः प्रेमैकलक्षणा शीघ्रम् ॥ ९॥

    इति श्रीकृष्णदासकृतं बालकृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् ।
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Laghu Saptashati लघु सप्तशती

    20-03-2026 | 6 Min.
    लघु दुर्गासप्तशती -
    माँ दुर्गा सभी दुखों को हर लेगी। यह पाठ करने से सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ करने का फल प्राप्त होता है।

    इसका पाठ कसी भी नवरात्रि में माँ दुर्गा के सामने गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करके और धूपबत्ती करके प्रतिदिन नौ पाठ करने चाहिए। इस पाठ से दुर्गा सप्तशती का फल मिलता है। इसके पाठ से सभी कामनाये सिद्ध हो जाती हैं। इसके पाठ से शत्रु बाधा एवं नवग्रह बाधा शांत हो जाती है। यह पाठ बीजमंत्रों से भरपूर है और माँ दुर्गा की सम्पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।

    ॐ ब्रीं-ब्रीं-ब्रीं वेणु-हस्ते, स्तुत-सुर-बटुकै: हां गणेशस्य माता। स्वानन्दे नन्द-रुपे, अनहत-निरते, मुक्तिदे मुक्ति-मार्गे॥
    हंसः सोहं विशाले, वलय-गति-हसे, सिद्ध-देवी समस्ता।
    हीं-हीं-हीं सिद्ध-लोके, कच-रुचि-विपुले, वीर-भद्रे नमस्ते॥१॥

    ॐ हींकारोच्चारयन्ती, मम हरति भयं, चण्ड-मुण्डौ प्रचण्डे।
    खां-खां-खां खड्ग-पाणे, ध्रक-ध्रक ध्रकिते, उग्र-रुपे स्वरुपे॥
    हुँ-हुँ हुँकांर-नादे, गगन-भुवि-तले, व्यापिनी व्योम-रुपे।
    हं-हं हंकार-नादे, सुर-गण-नमिते, चण्ड-रुपे नमस्ते॥२॥

    ऐं लोके कीर्तयन्ती, मम हरतु भयं, राक्षसान् हन्यमाने।
    घ्रां-घ्रां-घ्रां घोर-रुपे, घघ-घघ-घटिते, घर्घरे घोर-रावे ॥
    निर्मांसे काक-जंघे, घसित-नख-नखा, धूम्र-नेत्रे त्रि-नेत्रे।
    हस्ताब्जे शूल-मुण्डे, कुल-कुल ककुले, सिद्ध-हस्ते नमस्ते॥३॥

    ॐ क्रीं-क्रीं-क्रीं ऐं कुमारी, कुह-कुह-मखिले, कोकिलेनानुरागे।
    मुद्रा-संज्ञ-त्रि-रेखा, कुरु-कुरु सततं, श्री महा-मारि गुह्ये॥
    तेजांगे सिद्धि-नाथे, मन-पवन-चले, नैव आज्ञा-निधाने।
    ऐंकारे रात्रि-मध्ये, स्वपित-पशु-जने, तत्र कान्ते नमस्ते॥४॥

    ॐ व्रां-व्रीं-व्रूं व्रैं कवित्वे, दहन-पुर-गते रुक्मि-रुपेण चक्रे।
    त्रिः-शक्तया, युक्त-वर्णादिक, कर-नमिते, दादिवं पूर्व-वर्णे॥
    ह्रीं-स्थाने काम-राजे, ज्वल-ज्वल ज्वलिते, कोशिनि कोश-पत्रे।
    स्वच्छन्दे कष्ट-नाशे, सुर-वर-वपुषे, गुह्य-मुण्डे नमस्ते॥५॥

    ॐ घ्रां-घ्रीं-घ्रूं घोर-तुण्डे, घघ-घघ घघघे घर्घरान्याङि्घ्र-घोषे।
    ह्रीं क्रीं द्रूं द्रोञ्च-चक्रे, रर-रर-रमिते, सर्व-ज्ञाने प्रधाने॥
    द्रीं तीर्थेषु च ज्येष्ठे, जुग-जुग जजुगे म्लीं पदे काल-मुण्डे।
    सर्वांगे रक्त-धारा-मथन-कर-वरे, वज्र-दण्डे नमस्ते॥६॥

    ॐ क्रां क्रीं क्रूं वाम-नमिते, गगन गड-गडे गुह्य-योनि-स्वरुपे।
    वज्रांगे, वज्र-हस्ते, सुर-पति-वरदे, मत्त-मातंग-रुढे॥
    स्वस्तेजे, शुद्ध-देहे, लल-लल-ललिते, छेदिते पाश-जाले।
    किण्डल्याकार-रुपे, वृष वृषभ-ध्वजे, ऐन्द्रि मातर्नमस्ते॥७॥

    ॐ हुँ हुँ हुंकार-नादे, विषमवश-करे, यक्ष-वैताल-नाथे।
    सु-सिद्धयर्थे सु-सिद्धैः, ठठ-ठठ-ठठठः, सर्व-भक्षे प्रचण्डे॥
    जूं सः सौं शान्ति-कर्मेऽमृत-मृत-हरे, निःसमेसं समुद्रे।
    देवि, त्वं साधकानां, भव-भव वरदे, भद्र-काली नमस्ते॥८॥

    ब्रह्माणी वैष्णवी त्वं, त्वमसि बहुचरा, त्वं वराह-स्वरुपा।
    त्वं ऐन्द्री त्वं कुबेरी, त्वमसि च जननी, त्वं कुमारी महेन्द्री॥
    ऐं ह्रीं क्लींकार-भूते, वितल-तल-तले, भू-तले स्वर्ग-मार्गे।
    पाताले शैल-श्रृंगे, हरि-हर-भुवने, सिद्ध-चण्डी नमस्ते॥९॥

    हं लं क्षं शौण्डि-रुपे, शमित भव-भये, सर्व-विघ्नान्त-विघ्ने।
    गां गीं गूं गैं षडंगे, गगन-गति-गते, सिद्धिदे सिद्ध-साध्ये॥
    वं क्रं मुद्रा हिमांशोर्प्रहसति-वदने, त्र्यक्षरे ह्सैं निनादे।
    हां हूं गां गीं गणेशी, गज-मुख-जननी, त्वां महेशीं नमामि॥१०॥
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Hanumat Kavacham हनुमत् कवचम्

    24-02-2026 | 6 Min.
    श्रीमदानन्दरामायणान्तर्गत श्रीहनुमत्कवचं!! ✓

    ॐ श्री हनुमते नमः ॥
    ॐ अस्य श्रीहनुमत्कवच स्तोत्र महामन्त्रस्य,
    श्रीरामचन्द्र ऋषिः । श्रीहनुमान् परमात्मा देवता ।
    अनुष्टुप् छन्दः। मारुतात्मजेति बीजंअञ्जनीसूनुरिति शक्तिः। लक्ष्मणप्राणदातेति कीलकं ।
    रामदूतायेत्यस्त्रं । हनुमान् देवता इति कवचं ।
    पिङ्गाक्षोमित विक्रम इति मन्त्रः।श्रीरामचन्द्र प्रेरणया रामचन्द्र प्रीत्यर्थंमम सकल कामना सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥

    करन्यासः
    ॐ ह्रां अञ्जनीसुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
    ॐ ह्रीं रुद्र मूर्तये तर्जनीभ्यां नमः ।
    ॐ ह्रूं रामदूताय मध्यमाभ्यां नमः ।
    ॐ ह्रैं वायुपुत्राय अनामिकाभ्यां नमः ।
    ॐ ह्रौं अग्निगर्भाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
    ॐ ह्रः ब्रह्मास्त्र निवारणाय करतल करपृष्ठाभ्यां नमः।
    अङ्गन्यासः ॥
    ॐ ह्रां अञ्जनीसुताय हृदयाय नमः ।
    ॐ ह्रीं रुद्र मूर्तये शिरसे स्वाहा ।
    ॐ ह्रूं रामदूताय शिकायै वषट् ।
    ॐ ह्रैं वायुपुत्राय कवचाय हुं ।
    ॐ ह्रौं अग्निगर्भाय नत्रत्रयाय वौषट् ।
    ॐ ह्रः ब्रह्मास्त्र निवारणाय अस्त्राय फट् ।
    भूर्भुवःसुवरोमिति दिग्बन्धः।

    अथ ध्यानम् ॥
    ध्यायेत्बालदिवाकर द्युतिनिभं देवारिदर्पापहं
    देवेन्द्र प्रमुखं प्रशस्त यशसं देदीप्यमानं रुचा ।
    सुग्रीवादि समस्तवानरयुतं सुव्यक्त तत्त्वप्रियं
    संसक्तारुण लोचनं पवनजं पीताम्बरालङ्कृतं ॥ १॥

    उद्यन् मार्ताण्डकोटि प्रकट रुचियुतं चारुवीरासनस्थं
    मौञ्जी यज्ञोपवीताभरण रुचिशिखं शोभितं कुण्डलाङ्गं ।
    भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनाद प्रमोदं
    ध्यायेदेवं विधेयं प्लवग कुलपतिं गोष्पदीभूत वार्धिं ॥ २॥

    वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डल मण्डितं
    निगूढमुपसङ्गम्य पारावार पराक्रमं ॥ ३॥

    स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिं ।
    कुण्डल द्वय संशोभिमुखांभोजं हरिं भजे ॥ ४॥

    सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुं ।
    उद्यद् दक्षिण दोर्दण्डं हनुमन्तं विचिन्तयेत् ॥ ५॥

    अथ मन्त्रः ॥
    ॐ नमो हनुमते शोभिताननाय यशोलङ्कृताय
    अञ्जनीगर्भ संभूताय। राम लक्ष्मणानन्दकाय।
    कपिसैन्य प्रकाशन पर्वतोत्पाटनाय।
    सुग्रीवसाह्यकरण परोच्चाटन। कुमार ब्रह्मचर्य।
    गंभीर शब्दोदय।ॐ ह्रीं सर्वदुष्टग्रह निवारणाय स्वाहा।

    ॐ नमो हनुमते एहि एहि।सर्वग्रह भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विशमदुष्टानां सर्वेषामाकर्षयाकर्षय ।
    मर्दय मर्दय । छेदय छेदय । मर्त्यान् मारय मारय ।
    शोषय शोषय। प्रज्वल प्रज्वल।भूतमण्डल पिशाचमण्डल निरसनाय। भूतज्वर प्रेतज्वर चातुर्थिकज्वर ब्रह्मराक्षस पिशाचः छेदनः क्रिया विष्णुज्वर। महेशज्वरं छिन्धि छिन्धि। भिन्धि भिन्धि । अक्षिशूले शिरोभ्यन्तरे ह्यक्षिशूले गुल्मशूले
    पित्तशूले ब्रह्म राक्षसकुल प्रबल नागकुलविष निर्विषझटितिझटिति । ॐ ह्रीं फट् घेकेस्वाहा ।

    ॐ नमो हनुमते पवनपुत्र वैश्वानरमुख पापदृष्टि शोदा दृष्टि हनुमते घो अज्ञापुरे स्वाहा ।स्वगृहे द्वारे पट्टके तिष्डतिष्ठेति तत्र रोगभयं राजकुलभयं नास्ति ।
    तस्योच्चारण मात्रेण सर्वे ज्वरा नश्यन्ति ।
    ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् घेघेस्वाहा ।

    श्री रामचन्द्र उवाच-
    हनुमान् पूर्वतः पातु दक्षिणे पवनात्मजः ।
    अधस्तु विष्णु भक्तस्तु पातु मध्यं च पावनिः ॥ १॥
    लङ्का विदाहकः पातु सर्वापद्भ्यो निरन्तरं ।
    सुग्रीव सचिव: पातु मस्तकं वायुनन्दनः ॥ २॥
    भालं पातु महावीरो भृवोर्मध्ये निरन्तरं ।
    नेत्रे छायापहारी च पातु नः प्लवगेश्वरः ॥ ३॥
    कपोले कर्णमूले च पातु श्रीरामकिङ्करः ।
    नासाग्रं अञ्जनीसूनुः पातु वक्त्रं हरीश्वरः ॥ ४॥
    वाचं रुद्रप्रियः पातु जिह्वां पिङ्गल लोचनः ।
    पातु देवः फाल्गुनेष्टः चिबुकं दैत्यदर्पहा ॥ ५॥
    पातु कण्ठं च दैत्यारिः स्कन्धौ पातु सुरार्चितः ।
    भुजौ पातु महातेजाः करौ च चरणायुधः ॥ ६॥
    नगरन् नखायुधः पातु कुक्षौ पातु कपीश्वरः ।
    वक्षो मुद्रापहारी च पातु पार्श्वे भुजायुधः ॥ ७॥
    लङ्का निभञ्जनः पातु पृष्ठदेशे निरन्तरं ।
    नाभिं च रामदूतस्तु कटिं पात्वनिलात्मजः ॥ ८॥
    गुह्यं पातु महाप्राज्ञो लिङ्गं पातु शिवप्रियः ।
    ऊरू च जानुनी पातु लङ्काप्रसाद भञ्जनः ॥ ९॥
    जङ्घे पातु कपिश्रेष्ठोः गुल्फौ पातु महाबलः ।
    अचलोद्धारकः पातु पादौ भास्कर सन्निभः ॥ १०॥
    अङ्गान्यमित सत्वाढ्यः पातु पादरङ्गुलीस्तथा ।
    सर्वाङ्गानि महाशूरः पातु रोमाणि चाक्मवित् ॥ ११॥
    हनुमत् कवचं यस्तु पठेद् विद्वान् विचक्षणः ।
    स एव पुरुषश्रेष्ठो भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२॥
    त्रिकालमेककालं वा पठेन् मासत्रयं नरः ।
    सर्वान् रिपून् क्षणान् जित्वा स पुमान् श्रियमाप्नुयात् ॥ १३॥

    इति श्रीशतकोटि रामचरितांतर्गत श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मिकीये मनोहरकाण्डे श्रीहनुमत्कवचं सम्पूर्णं॥
Meer Religie podcasts
Over Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers
Chanting And Recitation Of Jain & Hindu Mantras And Prayers.
Podcast website

Luister naar Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers, The Ancient Tradition en vele andere podcasts van over de hele wereld met de radio.net-app

Ontvang de gratis radio.net app

  • Zenders en podcasts om te bookmarken
  • Streamen via Wi-Fi of Bluetooth
  • Ondersteunt Carplay & Android Auto
  • Veel andere app-functies
Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers: Podcasts in familie